रामलीला मैदान : जिन्ना से अन्ना तक


नई दिल्ली के इस विशाल रामलीला मैदान में रामलीला तो साल में सिर्फ करीब एक महीने ही होती है, लेकिन बाकी के महीनों में यहां राजनीतिक और सामाजिक आयोजन ज्यादा होते हैं। यह मैदान आजादी से पहले और बाद की कई ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा है। यहाँ मोहम्मद अली जिन्ना ने भी अपनी राजनीतिक तकरीर दी थी और अब अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने आंदोलन का खम ठोंक दिया है

वक्त ने नाम दिया रामलीला मैदान 
* दिल्ली का रामलीला मैदान हर साल उस समय चर्चा में आता है, जब दशहरे के मौके पर रामलीला का मंचन होता है और उसके बाद रावण दहन, क्योंकि समय के साथ-साथ पुरानी दिल्ली के कई संगठनों ने इस मैदान में रामलीलाओं का आयोजन करना शुरू कर दिया। इस कारण इस मैदान की पहचान रामलीला मैदान के रूप में बन गई।
* दिल्ली के दिल में इससे बड़ी खुली जगह और कोई नहीं थी, इसलिए रैली जैसे बड़े आयोजनों और आम जनता से सीधे संवाद के लिए ये मैदान राजनेताओं का पसंदीदा मैदान बन गया!
* गुलाम भारत और आजाद भारत के इतिहास में ऐसे मौकों की कोई कमी नहीं है, जब रामलीला मैदान ने अपना नाम दर्ज न कराया हो!
इतिहास बदलने का गवा
* इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान से युद्घ की जीत का जश्न इसी मैदान पर मनाया था।
* ये रामलीला मैदान देश के इतिहास बदलने का भी गवाह रहा है। आजादी की लड़ाई के दौरान महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और दूसरे नेताओं के लिए विरोध जताने का ये सबसे पसंदीदा मैदान बन गया था।
* इसी मैदान पर मोहम्मद अली जिन्ना से जवाहरलाल नेहरू तक और बाबा रामदेव से लेकर अण्णा हजारे तक सारे लोग इसी मैदान से क्रांति की शुरूआत करते रहे हैं।
* कहा जाता है कि यही वो मैदान है, जहां 1945 में हुई एक रैली में भीड़ ने जिन्ना को मौलाना की उपाधि दे दी थी। लेकिन, मोहम्मद अली जिन्ना ने मौलाना की इस उपाधि पर भीड़ से नाराजी जताई और कहा कि वे राजनीतिक नेता हैं न कि धार्मिक मौलाना! 
सत्ताधारी और विपक्ष दोनों की पसंद 
* इस मैदान का इस्तेमाल सरकारी रैलियों और सत्ता के खिलाफ आवाज बुलंद करने जैसी दोनों ही परिस्थितियों में किया जाता रहा है।
* दिसंबर 1952 में रामलीला मैदान में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को लेकर श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने सत्याग्रह किया था, जिससे सरकार हिल गई थी। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1956 और 57 में मैदान में विशाल जनसभाएँ की थीं।
* जयप्रकाश नारायण ने इसी मैदान से कांग्रेस सरकार के खिलाफ हुंकार भरी थी।
* 28 जनवरी 1961 को ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ ने रामलीला मैदान में ही एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था।
* 26 जनवरी 1963 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में लता मंगेशकर ने यहां एक कार्यक्रम पेश किया था।
* 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने इसी मैदान पर एक विशाल जनसभा में ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा एक बार फिर दोहराया था।
* 19672 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बांग्ला देश के निर्माण और पाकिस्तान से युद्घ जीतने का जश्न मनाने के लिए इसी मैदान में एक बड़ी रैली की थी, जहां उन्हें जनता का भारी समर्थन मिला था।
… जनता आती ह
* 25 जून 1975 को इसी मैदान पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने विपक्षी नेताओं के साथ ये ऐलान किया था कि इंदिरा गांधी की तानाशाह सरकार को उखाड़ फेंका जाए!
* ओजस्वी कवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्घ पंक्तियां ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है नारा’ यहींगूंजा और उसके बाद विराट रैली से सहमी इंदिरा गांधी सरकार ने 25-26 जून 1975 की दरमियानी रात को आपातकाल का ऐलान किया था।
* फरवरी 1977 में विपक्षी पार्टियों ने एक बार फिर इसी मैदान को अपनी आवाज जनता तक पहुंचाने के लिए फिर से चुना था।
* जनता पार्टी के झंडे तले बाबू जगजीवन राम के नेतृत्व में कांग्रेस छोड़कर आए मोरारजी देसाई, चौधरी चरणसिंह और चंद्रशेखर के साथ जनसंघ नेता अटल बिहारी वाजपेयी इसी मैदान के मंच पर एक साथ नजर आए थे।
* 80 और 90 के दशक के दौरान विरोध प्रदर्शनों की जगह बोट-क्लब बन गई थी। लेकिन, प्रधानमंत्री नरसिंह राव के कार्यकाल के दौरान बोट-क्लब पर प्रदर्शन पर रोक की वजह से इसी मैदान को भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर आंदोलन के शंखनाद के लिए चुना था।
* यहाँ पर कांग्रेस, भाजपा सहित अन्य दलों, सामाजिक और धार्मिक संगठनों के कई ऐतिहासिक कार्यक्रम होते रहे हैं।
* यही वो रामलीला मैदान है, जहाँ बाबा रामदेव ने काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना अनशन किया था, लेकिन 5 जून 2011 की रात उनके अनशन पर दिल्ली पुलिस ने लाठियां बरसाकर उन्हें वहाँ से हरिद्वार भेज दिया था। अब बारी अण्णा हजारे के ऐतिहासिक आंदोलन की है! 
कैसा है ये मैदान : अजमेरी गेट और तुर्कमान गेट के बीच 10 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस रामलीला मैदान में एक लाख लोग खड़े हो सकते हैं। पर, पुलिस के मुताबिक यहाँ सिर्फ 25 से 30 हजार लोगों की क्षमता है। कहा जाता है कि इस मैदान को अंग्रेजों ने 1883 में ब्रिटिश सैनिकों के शिविर के लिए तैयार करवाया था।

~ by bollywoodnewsgosip on August 21, 2011.

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