अनशन पर असहमत ‘सरकार’


भ्रष्टाचार से परेशानी पर जादू की छड़ी नहीं-मनमोहन

भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए एक मजबूत लोकपाल का वायदा करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने सोमवार को स्वीकार किया कि केंद्र और राज्य सरकारों के कुछ लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। उन्होंने मंगलवार से शुरू हो रहे अण्णा हजारे के अनशन का सीधा उल्लेख किए बिना कहा कि लोगों को अपनी बात मनवाने के लिए भूख हड़ताल और अनशन का सहारा नहीं लेना चाहिए।

देश के 65वें स्वतंत्रता दिवस पर ऐतिहासिक लालकिले की प्राचीर से लगातार आठवें साल राष्ट्र के नाम संबोधन में उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हम चाहते हैं कि सभी राजनीति दल कंधे से कंधा मिलाकर इस लड़ाई में शामिल हों। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए हमने संसद में विधेयक पेश किया है और कई अन्य विधेयक पेश किए जाएंगे। मुझे उम्मीद है कि सभी राजनीतिक दल इन विधेयकों को मूर्त रूप देने की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।

अनशन से असहमति : प्रधानमंत्री ने हालांकि अण्णा हजारे के कल से शुरू हो रहे अनशन से सरकार की असहमति जताते हुए कहा कि मैं जानता हूं कि विधेयक के कुछ पहलुओं पर मतभेद हैं, जो लोग विधेयक से सहमत नहीं हैं वे अपने विचार संसद, राजनीतिक दलों और मीडिया तक को दे सकते हैं। हालांकि मेरा विश्वास है कि उन्हें भूख हड़ताल और अनशन जैसे कदम नहीं उठाने चाहिए।

मनमोहन ने कहा कि भ्रष्टाचार पर मैं इतना अधिक इसलिए बोला क्योंकि मैं जानता हूं कि यह समस्या हम सबको गहराई तक परेशान कर रही है, हालांकि यह एक ऐसी परेशानी है जिसे दूर करने के लिए किसी सरकार के पास ‘जादू की छड़ी’ नहीं है।

भ्रष्टाचार के कई चेहरे : प्रधानमंत्री ने कहा कि यह जरूरी है कि भ्रष्टाचार के मुद्दों पर विचार करते समय हम ऐसा माहौल पैदा नहीं करें जिससे देश की प्रगति पर सवाल खड़ा हो। इन मुद्दों पर किसी भी चर्चा में यह विश्वास झलकना चाहिए कि हम इन चुनौतियों से उबर सकते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि भ्रष्टाचार कई शक्लों में सिर उठा रहा है। कई मामलों में आम आदमी की कल्याण योजनाओं के लिए आवंटित धन सरकारी अधिकारियों की जेब में चला जाता है, कुछ अन्य मामलों में सरकार के विवेकाधिकार का कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए इस्तेमाल हो जाता है। सिंह ने कहा कि हम ऐसी गतिविधियों को जारी रहने नहीं दे सकते।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरा मानना है कि कोई एक ऐसा बड़ा कदम नहीं है जिससे भ्रष्टाचार समाप्त किया जा सके। वास्तव में हमें कई मोर्चों पर एक साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें न्याय प्रणाली में सुधार लाना होगा। हर किसी को यह मालूम होना चाहिए कि भ्रष्टाचार के खिलाफ तुरंत कार्रवाई होगी और दंड मिलेगा। अगर हमारी न्यायिक प्रणाली प्रभावकारी होगी तो सरकारी अधिकारी लालच या राजनीतिक दबाव में कोई गलत काम करने से पहले दो बार सोचेंगे।

न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाने के हजारे पक्ष की मांग से असहमति जताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा किया जाना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा करना न्यायपालिका की स्वतंत्रता के खिलाफ होगा। उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसे ढांचे की जरूरत है जिसमें न्यायपालिका जवाबदेह बने। इसी उद्देश्य के तहत हमने न्यायिक जवाबदेही विधेयक पेश किया है। मुझे विश्वास है कि यह विधेयक जल्द ही पारित हो जाएगा।

आतंकवाद के खिलाफ कोताही नहीं : प्रधानमंत्री ने कहा कि मुंबई में हुए हाल में हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों ने हमें चेताया है कि आतंकवाद के खिलाफ सतर्कता में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले महीने मुंबई में हुए आतंकवादी हमले ने हमें चेताया है कि जहां तक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का प्रश्न है, हमारी सतर्कता और निगरानी में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। यह एक लम्बी लड़ाई है जिसें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और आम आदमी को मिलकर लड़ना है। सिंह ने कहा कि सरकार अपनी खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों को लगातार मजबूत बना रही है और भविष्य में भी ऐसा करना जारी रखेंगे।

महंगाई रोकने की कोशिश : देश में बढ़ती महंगाई का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश सतत उच्च मुद्रास्फिति के दौर से गुजर रहा है। महंगाई को नियंत्रित करने की मुख्य जिम्मेदारी सरकार की होती है। उन्होंने पेट्रोलियम उत्पादों, खाद्यान्नों और खाद्य तेलों के अंतरराष्ट्रीय मूल्य में उछाल को महंगाई का मुख्य कारण बताते हुए कहा कि सरकार देश में महंगाई कम करने का सतत प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि कभी हम महंगाई को नियंत्रित करने में सफल भी हुए लेकिन यह सफलता स्थायी साबित नहीं हुई। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आने वाले महीनों में इस समस्या का समाधान निकालना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता जरूरी : पिछले दिनों देश के कई हिस्सों में भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों के गुस्से के फूटने के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं इस बारे में पूरी तरह से सजग हूं कि उद्योग, ढांचागत परियोजनाओं और शहरीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर देश के कुछ क्षेत्रों मे तनाव हैं। हमारे किसान खासतौर से ऐसे अधिग्रहण से प्रभावित हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक हित की परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण जरूरी है, लेकिन ऐसा पारदर्शी और उचित तरीके से किया जाना चाहिए। उन लोगों के हितों का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए जो आजीविका के लिए उस भूमि पर निर्भर हैं, जिसे अधिग्रहित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसी के साथ कोई अन्याय नहीं होने पाए। इस दिशा में 117 साल पुराने भूमि अधिग्रहण कानून की जगह नया विधेयक लाने के बारे में उन्होंने कहा कि इसे शीघ्र ही संसद में पेश किया जाएगा।

कुपोषण पर चिंता : सिंह ने कहा कि महिलाओं और बच्चों में कुपोषण हम सब के लिए चिंता की बात है। उन्होंने बेहतर समन्वित बाल विकास सेवा योजना अगले छह महीने के भीतर लागू करने का वायदा किया और कहा कि इससे बच्चों में कुषोषण की समस्या से प्रभावकारी ढंग से निपटने में मदद मिलेगी।

लिंग अनुपात में बढ़ती खाई पर खेद प्रकट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली जनगणना की तुलना में 2011 की जनगणना में इस खाई का और बढ़ना चिंता की बात है।

महिलाओं के प्रति समाज का दृष्टिकोण बदले : उन्होंने कहा कि इस विषमता से निपटने के लिए न केवल वर्तमान कानूनों को प्रभावकारी ढंग से लागू किए जाने की जरूरत है बल्कि बच्चियों और महिलाओं के बारे में समाज के दृष्टिकोण को भी बदले जाने की आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने सभी राज्य सरकारों और समाज सेवा संगठनों से अपील की कि वे समाज में महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए और प्रभावकारी कदम उठाएं

~ by bollywoodnewsgosip on August 15, 2011.

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