क्रिकेटरों में ‘जीत की भूख’ नदारद


भारतीय क्रिकेटरों ने इंग्लैंड दौरे पर जो ‘कलंक का टीका’ लगाया है, उसे आसानी से मिटाया नहीं जा सकेगा। लॉर्ड्‍स और ट्रेंटब्रिज की विकेट पर बुरी तरह धराशायी हुई भारतीय टीम का पुलिंदा एजबेस्टन में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट में भी बंधने ही जा रहा है। तीसरे टेस्ट के तीसरे दिन ही इंग्लैंड ‘ड्रायविंग सीट’ पर बैठा हुआ है। यदि भारत यह सिरीज 0-4 से हार जाए तो आप बिलकुल भी गम मत मनाइगा क्योंकि यह टीम है ही इसी लायक।

टीकाकार इस टीम को चाहे जितना कोसें, दौलत और शोहरत की आसमानी ऊंचाई पर बैठे इन मोटी चमड़ी वाले क्रिकेटरों पर कोई असर नहीं होने वाला है। पूरी टीम में ‘जीत की कहीं भूख’ दिखाई ही नहीं दे रही है। जो जोश और जज्बा तीन महीने पहले विश्वकप क्रिकेट के दौरान नजर आया था, उसकी थोड़ी-सी भी झलक इंग्लैंड दौरे में दिखाई नहीं दी।

मैदान पर खिलाड़ियों की बॉडी लेंग्वेज ऐसी है कि वे पहले लंच का इंतजार करते हैं, फिर चाय तक किसी तरह मैदान में समय बिताते हैं और सोचते हैं कि जितनी जल्दी दिन का खेल खत्म हो जाए, बेहतर है। एक तरफ लंदन दंगों की आग में झुलसा है और दूसरी तरफ भारतीय क्रिकेटरों ने अपने दोयम दर्जे के प्रदर्शन से करोड़ों देशवासियों के दिलों पर जख्म दे दिए।

देश की सवा अरब से ज्यादा जनसंख्या में जितने भी युवा क्रिकेटप्रेमी हैं, उन्हें अभी क्रिकेट रास नहीं आ रहा है। वे टीवी से अपनी नजरें दूर रख रहे हैं या फिर उनकी रुचि इतनी भर है कि स्कोर कहां तक पहुंचा? इसके अलावा उन्हें इस टेस्ट सिरीज से कोई सरोकार नहीं है।

तीसरे टेस्ट मैच का दूसरा दिन बेहद नाटकीय रहा। स्लिप में राहुल द्रविड़ जैसे अनुभवी खिलाड़ी ने 2 आसान कैच टपकाए। शांतकुमारन श्रीसंथ ने पॉइंट पर दोहरा शतक जड़ने वाले एलेस्टेयर कुक का ‘लड्‍डू’ कैच टपकाया।

यहां तक कि सचिन तेंडुलकर ने भी एक कैच छोड़ा। सचिन ने कैच के लिए प्रयास ही नहीं किया और कैच टपकाने के बाद वे खिसियाने अंदाज में हंसते हुए नजर आए। एक दिन में चार कैच टपकाने के बाद आप टीम से क्या उम्मीद रख सकते हैं?

तीन टेस्ट मैचों का विश्लेषण करने पर पाते हैं कि भारत के थिंक टैंक ने टेस्ट मैचों के लिए कोई प्लानिंग नहीं की। पहले बल्लेबाजी बुरी तरह फ्लॉप हुई और धोनी के 74 रनों के सहारे भारत रेंगते हुए 224 रन ही बना पाया।

चोटिल जहीर खान की गैर मौजूदगी में ईशांत शर्मा, श्रीसंथ और प्रवीण कुमार की तिकड़ी ने लचर प्रदर्शन किया। टीम में शामिल एकमात्र ‍ले‍ग स्पिनर ‍अमित मिश्रा भी दिशाहीन गेंदबाजी करते नजर आए। ऐसी बात नहीं थी कि विकेट से स्विंग नहीं मिल रहीं थी, बल्कि भारतीय गेंदबाज समझ ही नहीं पा रहे थे कि उन्हें इस स्विंग से किस तरह का लाभ उठाना है।

ताज्जुब है कि एजबेस्टन का वही विकेट है, जहां भारतीय स्टार बल्लेबाज किसी तरह 224 रन निकाल पाए थे और उसी विकेट पर इंग्लिश बल्लेबाज 700 से ज्यादा रन कूट चुके हैं। साफ जाहिर है कि धोनी बगैर प्लानिंग इंग्लैंड का सामना करने मैदान में उतरें हैं। न तो वे ‍गेंदबाज से चर्चा करते हैं और न ही मैदान के बाहर कोई योजना बनती है।

ऐसा लग रहा है कि वाकई मैदान पर दुनिया की नंबर एक टीम नहीं, बल्कि स्कूली टीम खेल रही है। एलेस्टेयर कुक ने मन चाहे स्ट्रोक खेलकर अपना दोहरा शतक पूरा किया तो मॉर्गन ने भारतीय गेंदबाजों की निर्ममता से पिटाई करके 104 रन बनाए। किसी भी गेंदबाज में इतनी कूवत नहीं है कि वे इंग्लिश बल्लेबाजों पर नकेल कस सके।

700 से ज्यादा का स्कोर भारतीय क्रिकेटरों पर मनौवैज्ञानिक असर डालेगा क्योंकि 2 दिन में इंग्लैंड के तेज गेंदबाज कभी भी भारत की नैया डुबो सकने की ताकत रखते हैं। यह भी संभव है कि इंग्लैंड इस टेस्ट मैच को पारी के अंतर से जीते। तय मानिए कि एजबेस्टन में भारत की हार को ‍कोई चमत्कार नहीं, बल्कि बारिश की बूंदें ही बचा सकती हैं।

~ by bollywoodnewsgosip on August 13, 2011.

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