द्रविड़ का सबसे संतोषजनक शतक


भारत के सीनियर बल्लेबाज राहुल द्रविड़ ने कहा है कि इंग्लैंड के खिलाफ यहां चल रहे पहले क्रिकेट टेस्ट की पहली पारी में बनाया उनका नाबाद शतक उनके कैरियर के सबसे ‘संतोषजनक’ लम्हों में से एक है।

क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लार्ड्स में शतक जमाने के बाद द्रविड़ ने स्वीकार किया कि पिछले साल दक्षिण अफ्रीका में खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें अपनी क्षमता पर संदेह हो गया था।

भारत मध्यक्रम के इस बल्लेबाज की नाबाद 103 रन की पारी की मदद से फालोआन टालने में सफल रहा जो उनके कैरियर का 33वां शतक भी है। द्रविड़ ने कहा कि जब रन नहीं बनते तो आपको अपनी क्षमता पर संदेह हो जाता है। खिलाड़ियों के लिए ऐसा होना स्वाभाविक है।

द्रविड़ ने दक्षिण अफ्रीका में तीन टेस्ट की छह पारियों में 20 की औसत से 120 रन बनाये थे लेकिन वह अब एक महीने में दो शतक बनाकर लय हासिल कर चुके हैं। उन्होंने जमैका में वेस्टइंडीज के खिलाफ 116, जबकि लार्ड्स में नाबाद 103 रन की पारी खेली।

उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह मेरे कैरियर की सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक है। जमैका का शतक विशेष था क्योंकि हम टेस्ट जीतने में सफल रहे और वह बल्लेबाजी के लिए आसान विकेट नहीं था। और अब यह पारी, मैच के हालात और स्थिति को देखते हुए यह सबसे संतोषजनक है।

द्रविड़ ने कहा कि मुझे हमेशा इंग्लैंड का दौरा करने में मजा आता है। आप इस टेस्ट को देखिए, स्टेडियम खचाखच भरा हुआ है, यहां अब भी टेस्ट क्रिकेट का समर्थन किया जाता है और एक टेस्ट क्रिकेटर के रूप में जिसे टेस्ट क्रिकेट पसंद है, इससे बेहतर स्थान नहीं हो सकता। कोई भी विकेट चटकाए या रन बनाए वे उसका समर्थन करते हैं और ताली बजाते हैं। यह बेहतरीन दौरा है क्योंकि आपको पता है कि आपको खचाखच भरे स्टेडियम में खेलना है।

यह दिग्गज बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट में पदापर्ण के दौरान 1996 में इसी मैदान पर शतक से चूक गया था लेकिन 15 बरस बाद उसने इसकी भरपाई कर ली। उन्होंने कहा कि मुझे स्वीकार करना होगा कि यह मेरे जेहन में था। मुझे लगा कि अगर यहां शतक बनता है तो ठीक है अन्यथा कई महान क्रिकेटर हैं जो यहां शतक नहीं बना पाए। मुझे पता था कि मुझे एक और मौका मिला है। ऐसे हालातों में यह शतक बनाना इसे विशेष बनाता है।

सम्मान बोर्ड पर नाम आना अच्छा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के बीच अब भी इस सम्मान की सबसे अधिक चर्चा होती है। मैच से पहले सारी हाइप सचिन तेंडुलकर के 100वें अंतरराष्ट्रीय शतक को लेकर थी और द्रविड़ ने कहा कि एक तरह से यह उनके लिए आदर्श था।

द्रविड़ ने कहा कि उसके बारे में सबसे अधिक बात की गई और संभवत: यह सही भी था। वह खेल का महान खिलाड़ी है और अच्छी बल्लेबाजी कर रहा था। मेरे उपर ध्यान नहीं होना अच्छा रहा। सारा ध्यान उसके उपर था जिससे मैं आराम से अपना काम करने में सफल रहा।

मध्यक्रम के इस बल्लेबाज ने कहा कि पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ खेलते हुए उन्होंने तेजी से रन बनाकर अपना व्यक्तिगत शतक पूरा करने की कोशिश नहीं की क्योंकि वह सिर्फ फालोआन टालने को लेकर चिंतित थे। उन्होंने कहा कि उस समय सिर्फ यही अहम था कि किस तरह 275 रन बनाए जाएं।

मैंने प्रवीण से बात की और कहा कि प्रत्येक रन बनाया जाए। मैंने शाट खेलने के लिए उसका समर्थन किया और उसने कुछ शाट मारे भी। उसने 17 रन बनाए हालांकि वह कुछ मौकों पर भाग्यशाली रहा।

द्रविड़ ने कहा कि 275 रन बनने के बाद ही जब मुझे शतक के लिए छह या सात रन और बनाने थे तब मैंने इसके बारे में सोचना शुरू किया। भारत के इस पूर्व कप्तान ने कहा कि पूरे दिन गेंद स्विंग कर रही थी और बल्लेबाजी करना चुनौतीपूर्ण था।

मेहमान टीम के लिए यह अच्छी खबर हो सकती है कि जब भी द्रविड़ ने शतक बनाया है तब टीम इंडिया को 2001 में जिम्बाब्वे के अलावा कभी शिकस्त का सामना नहीं करना पड़ा। द्रविड़ ने कहा कि चौथे दिन इंग्लैंड को बड़ा स्कोर बनाने से रोकने के लिए जल्द विकेट चटकाना अहम होगा।

~ by bollywoodnewsgosip on July 24, 2011.

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