सहवाग-गंभीर की जोड़ी द बेस्ट


सुनील गावस्कर भारत के सर्वश्रेष्ठ सलामी बल्लेबाज रहे हैं। उन्होंने 1987 में जब संन्यास लिया तब से अब तक भारत ने 57 सलामी जोड़ियां आजमाई हैं लेकिन केवल वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर की जोड़ी ही अपेक्षाओं पर खरी उतर पाई।

अब जबकि सहवाग और गंभीर चोटों की वजह से वेस्टइंडीज दौरे पर नहीं जा पाए तो भारत फिर से अदद सलामी जोड़ी के लिए तरस रहा है। वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले दो टेस्ट मैचों में मुरली विजय और अभिनव मुकुंद ने पारी का आगाज किया लेकिन पहली तीन पारियों में उन्हें असफलता हाथ लगी जिसके कारण कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को भी कहना पड़ा कि सलामी जोड़ियों के भी विकल्प तैयार करने होंगे।

धोनी ने कहा, ‘‘मेरे हिसाब से सलामी बल्लेबाजों के भी पूल तैयार करना महत्वपूर्ण है। ओपनिंग ऐसा स्थान है जहां हमेशा कड़ी परीक्षा होती है। आप बहुत अच्छे ओपनर हो सकते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब तक आपकी अच्छी तरह से परख नहीं होती तब आपके जज्बे का पता नहीं चलता।’’

मुकुंद को देश का प्रतिभाशाली सलामी बल्लेबाज माना जाता है लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ वे अभी तक 11, 25 और एक रन ही बना पाए हैं। मुरली विजय भी सहवाग और गंभीर की अनुपस्थिति में अपने अनुभव का फायदा टीम को नहीं दिला पाए हैं। उन्होंने अब तक आठ, शून्य और 11 रन बनाए हैं।

वैसे यह पहला अवसर नहीं है जबकि भारत को अच्छी सलामी जोड़ी की कमी खल रही है। गावस्कर के संन्यास के बाद भारत की यह सबसे बड़ी समस्या रही है लेकिन सहवाग और गंभीर ने टीम को इससे निजात दिला रखी है। यह अलग बात है जब भी ये दोनों टीम में नहीं होते हैं तब मुश्किले बढ़ जाती हैं। सहवाग ने गंभीर के अलावा वसीम जाफर के साथ 28 पारियों में पारी का आगाज किया जिसमें इन दोनों ने मिलकर 1031 रन बनाए हैं।

वर्ष 2000 के बाद यदि भारतीय सलामी जोड़ियों पर नजर दौड़ाई जाए तो इसमें सहवाग और गंभीर का पूरी तरह से दबदबा दिखता है। भारत ने इन 11 वर्षों में 29 जोड़ियां आजमाई हैं लेकिन 2004 में गंभीर के टेस्ट पदार्पण के बाद उसे सलामी जोड़ी को लेकर बहुत अधिक माथापच्ची नहीं करनी पड़ी।

सहवाग ने इन वर्षों में गंभीर और जाफर के अलावा आकाश चोपड़ा और मुरली विजय के साथ भी कुछ अवसरों पर सफल जोड़ी बनाई। उन्होंने चोपड़ा के साथ 19 पारियों में 897 और विजय के साथ दस पारियों 798 रन जोड़े। सहवाग के आगमन से पहले शिवसुंदर दास और सदगोपन रमेश की जोड़ी (19 पारियों में 836 रन) ने भी कुछ समय तक टीम के शीर्ष क्रम को स्थायित्व प्रदान किया था जबकि बीच में जाफर और दिनेश कार्तिक (14 पारियों में 744 रन) ने उम्मीदें जगाई थीं।

भारत ने इन 11 वर्षों में हालांकि कई अजीबोगरीब सलामी जोड़ियां भी आजमाईं। जैसे कि एक बार राहुल द्रविड़ और सचिन तेंडुलकर पारी का आगाज करने के लिए उतरे तथा इरफान पठान और युवराज सिंह सरीखे खिलाड़ियों को पारी के आगाज का जिम्मा सौंपा गया।

~ by bollywoodnewsgosip on June 30, 2011.

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