जब कैच छोड़ना पड़ा बेहद महंगा


वेस्टइंडीज के कप्तान डेरेन सैमी की भारत के खिलाफ पहले टेस्ट क्रिकेट मैच में राहुल द्रविड़ का कैच छोड़ने के बाद रातों की नींद उड़ गई। यह चूक कैरेबियाई टीम को बहुत महंगी पड़ी और उसने न सिर्फ टेस्ट मैच गंवाया बल्कि उस पर श्रृंखला हारने का खतरा भी मंडराने लगा है।

‘कैचेज विन मैचेज’ क्रिकेट में काफी पुरानी कहावत है लेकिन यह हमेशा इस खेल पर लागू होती रहेगी। क्रिकेट में सैमी के साथ जो कुछ हुआ वह पहला मामला नहीं था। इससे पहले भी कई अवसरों पर बल्लेबाजों ने जीवनदान का अच्छा खासा फायदा उठाया और विरोधी टीमों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।

इंग्लैंड के खिलाफ 1990 में लार्डस टेस्ट में भारतीय विकेटकीपर किरण मोरे ने युवा तेज गेंदबाज संजीव शर्मा की गेंद पर ग्राहम गूच का कैच छोड़ दिया था। तब गूच 36 रन पर खेल रहे थे। उन्होंने इस जीवनदान का भरपूर फायदा उठाया और 333 रन बना डाले। इंग्लैंड ने यह मैच और श्रृंखला जीती और संजीव फिर कभी टेस्ट टीम में नहीं चुने गए।

वेस्टइंडीज के कप्तान कार्ल हूपर का भारत के खिलाफ 2002 में गयाना टेस्ट मैच में भाग्य ने साथ दिया था। जवागल श्रीनाथ की गेंद उनके बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर दीप दासगुप्ता के पास पहुंची थी लेकिन उन्होंने उसे छोड़ दिया। हूपर ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा और 233 रन ठोक दिए। वेस्टइंडीज ने आखिर में यह श्रृंखला 2-1 से जीती थी।

उस मैच में पाकिस्तान का स्कोर पहली पारी में एक समय छह विकेट पर 26 रन था। दूसरी पारी में भी उसकी स्थिति नाजुक थी लेकिन सलामी बल्लेबाज सईद अनवर की नाबाद 188 रन की पारी से वह मैच जीतने में सफल रहा। तब मोहम्मद अजहरूद्दीन ने पारी के शुरू में ही बायें हाथ के इस बल्लेबाज का कैच टपका दिया था।

भारतीयों ने भी कई बार कैच छूटने का फायदा उठाया। तेंडुलकर को पाकिस्तान के खिलाफ विश्वकप की पिछली दोनों पारियों में जीवनदान मिले और उन्होंने इसका फायदा उठाकर बड़ी पारियां खेली।

विश्वकप 2003 के दौरान सेंचुरियन में खेले गए मैच में तेंडुलकर जब 32 रन पर थे तब वसीम अकरम की गेंद पर उन्होंने मिड ऑफ पर कैच उछाल दिया था लेकिन अब्दुल रज्जाक ने उसे छोड़ दिया। रज्जाक ने बाद में कहा कि यह चूक उन्हें वर्षों तक सालती रही।

हाल में मोहाली में खेले गए विश्वकप सेमीफाइनल में पाकिस्तानी क्षेत्ररक्षकों ने चार बार तेंडुलकर को जीवनदान दिया। इसके अलावा निर्णय समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) भी उनके पक्ष में गई थी। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इमरान खान ने तब कहा था, ‘आप तेंडुलकर को चार जीवनदान देकर मैच नहीं जीत सकते।’

इंग्लैंड के खिलाफ 2002 की श्रृंखला में द्रविड़ को अंपायर ने जीवनदान दिया था। द्रविड़ अभी 40 रन के पार ही पहुंचे थे कि गेंद उनके बल्ले को चूमती हुई विकेटकीपर के पास पहुंच गई। अंपायर इसे नहीं सुन पाए। द्रविड़ ने 148 रन बनाए और भारत ने श्रृंखला 1-1 से बराबर कर दी।

कैच छोड़ने की सबसे महत्वपूर्ण घटना 1999 विश्वकप के दौरान घटी थी। तब दक्षिण अफ्रीका के हर्शल गिब्स ने ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन कप्तान स्टीव वॉ का कैच छोड़ दिया था। वॉ ने तब गिब्स से कहा था, ‘बेटे तुमने अभी विश्व कप गंवा दिया।’

यदि प्रथम श्रेणी मैचों की बात करें तो ब्रायन लारा ने जब वारविकशर की तरफ से खेलते हुए डरहम के खिलाफ रिकॉर्ड 501 रन की पारी खेली थी तो तब उन्हें 18 रन के निजी योग पर जीवनदान मिला था। डरहम के विकेटकीपर क्रिस स्कॉट ने उनका कैच छोड़ा था।

~ by bollywoodnewsgosip on June 26, 2011.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: