प्रधानमंत्री भी हों लोकपाल के दायरे में-दि‍ग्गी


सरकार संप्रग के रुख से अलग राय जताते हुए कांग्रेस महासचिव दिग्विजयसिंह ने प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को भी लोकपाल के दायरे में लाने की वकालत की है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि व्यवस्था ऐसी होना चाहिए, जिससे लोकपाल अपने पद का दुरुपयोग नहीं कर सके।

निजी यात्रा पर अपने गृह नगर राघौगढ़ आए सिंह ने शनिवार शाम कहा कि मेरे मत में लोकपाल के तहत प्रधानमंत्री, न्यायपालिका, गैर सरकार संगठनों (एनजीओ) तथा औद्यौगिक घरानों को भी लाना चाहिए। मैं जब मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री था, तो मैने मुख्यमंत्री पद को लोकायुक्त के दायरे में लाया था, लेकिन व्यवस्था ऐसी होना चाहिए, जिससे लोकपाल अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं कर सके।

बहरहाल उन्होंने अण्णा हजारे जैसे चंद समाजसेवियों की ओर परोक्ष इशारा करते हुए कहा कि पांच-सात व्यक्तियों द्वारा सरकार पर दबाव डालने की प्रवृत्ति संसदीय लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।

उधर, कांग्रेस सूत्रों ने दिग्विजय के विचारों को यह कहकर खारिज कर दिया कि प्रधानमंत्री तथा अन्य शीर्ष पदों को लोकपाल के दायरे में लाने के मुद्दे पर पार्टी सरकार के दृष्टिकोण का साथ देगी।

स्वामी रामदेव पर निशाना : योग गुरु बाबा रामदेव पर आक्रामक टिप्पणियां जारी रखते हुए दिग्विजयसिंह ने उनसे यह खुलासा करने की मांग की कि विदेशी बैंकों में लाखों करोड़ रुपए जमा होने की जानकारी उन्हें कहां से और कैसे हासिल हुई। सिंह कहा कि अब धीरे-धीरे बाबा की कलई खुलने लगी है और जल्दी ही भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी उनसे पल्ला झाड़ लेंगे। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि कांग्रेस काला धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ संवेदनशील है। इसीलिए उनकी पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ‘सूचना का अधिकार’ जैसा क्रांतिकारी कानून देश की जनता को दिया।

सिंह ने कहा कि विदेशों से काला धन वापस लाने के लिए संबंधित राष्ट्रों से संधि करनी होती है। भारत ऐसी संधि विश्व के 23 राष्ट्रों से कर चुका है। उन्होंने बाबा के दिल्ली में शुरू किए गए अनशन पर फिर सवाल उठाते हुए कहा कि जब रामदेव ही कह चुके थे कि उनकी 99 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं तो उन्हें दोबारा अनशन पर बैठने की जरूरत क्या थी?

हजारे और रामदेव में फर्क नहीं : समाजसेवी अण्णा हजारे और उनके सहयोगियों द्वारा केंद्र सरकार को भला-बुरा कहने संबंधी सवालों पर सिंह ने कहा कि ‘सिविल सोसायटी’ को ऐसा करने की बजाय लोकपाल विधेयक का मसौदा पूरा कराने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारे और बाबा रामदेव के आंदोलनों में कोई फर्क नहीं है, क्योंकि दोनों के ही पीछे सुब्रमण्यम स्वामी, गोविंदाचार्य और अजीत दुआ जैसे लोग जुड़े हुए हैं।

~ by bollywoodnewsgosip on June 13, 2011.

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