पीएम के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव


प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने 2008 में संप्रग-एक सरकार के विश्वासमत के दौरान सांसदों को रिश्वत दिए जाने के आरोप का शुक्रवार को खंडन किया। हालाँकि मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने प्रधानमंत्री पर गलतबयानी का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ संसद के दोनों सदनों में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने का एलान किया।

विपक्ष की माँग पर संसद के दोनों सदनों में बयान देते हुए प्रधानमंत्री ने इन आरोपों का पूरी तरह खंडन किया कि संप्रग-एक सरकार या कांग्रेस पार्टी के किसी भी सदस्य ने 2008 के दौरान लोकसभा में विश्वासमत जीतने के लिए कोई गैर कानूनी तरीका अपनाया था।

सिंह ने कहा कि नोट के बदले वोट घोटाले की जाँच 14वीं लोकसभा द्वारा नियुक्त एक समिति ने की थी, जिसने निष्कर्ष दिया कि रिश्वतखोरी के बारे में कोई निष्कर्ष निकालने के लिए अपर्याप्त सबूत हैं।

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि सिंह ने समिति की रिपोर्ट को लेकर सदन को गुमराह किया है इसलिए उनके खिलाफ हम विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएँगे।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि समिति के निष्कर्षों के बारे में प्रधानमंत्री का बयान पूरी तरह बदला हुआ है। समिति ने पाया था कि (संजीव) सक्सेना रिश्वत देने वाला व्यक्ति था और उसकी भूमिका को लेकर आगे और जाँच की आवश्यकता है। जेटली ने कहा कि पिछले दो साल से इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है।

उधर लोकसभा और राज्यसभा में सिंह के खंडन के बावजूद विपक्ष ने हंगामा जारी रखा, जिसके कारण बैठक तीन-तीन बार के स्थगन के बाद मंगलवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

दोनों ही सदनों में विपक्ष के नेताओं ने बयान के बाद स्पष्टीकरण चाहे लेकिन आसन ने नियमों का हवाला देते हुए इसकी इजाजत नहीं दी। विकीलीक्स खुलासे में लगाए गए आरोपों को दृढ़ता से नकारते हुए आक्रामक नजर आए प्रधानमंत्री ने इसे दुर्भाज्ञपूर्ण बताया कि विपक्ष अपुष्ट और अटकलबाजी पर आधारित रिपोर्ट को सम्मान दे रहा है।

इस मुद्दे पर कल भी दोनों सदनों में बैठक दिन भर बाधित रही थी और आज भी सुबह से हंगामा जारी था। मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने प्रधानमंत्री के बयान पर असंतोष व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि विश्वास मत का सबसे बड़ा लाभ प्रधानमंत्री को मिला।

सुषमा स्वराज और जेटली ने प्रधानमंत्री के संसद में वक्तव्य के बाद कहा कि भले ही आप कह रहे हैं कि मनमोहन अपराधी नहीं हैं, लेकिन विश्वासमत की सफलता में हुए अपराध के आप भी लाभार्थी हैं। उन्होंने संसद में बयान देने से पहले इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में प्रधानमंत्री द्वारा इस संबंध में वक्तव्य दिए जाने को भी संसद की अवमानना करार दिया।

उधर संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि विपक्ष की माँग पर प्रधानमंत्री ने बयान दे दिया है इसलिए संसद की कार्यवाही अब चलने देनी चाहिए।
Msn India

~ by bollywoodnewsgosip on March 19, 2011.

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