2जी स्पेक्ट्रम मामले में नया पहलू


उच्चतम न्यायालय ने शनिवार को कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले में चेन्नई की दूरसंचार ऑपरेटर एस-टेल के लाइसेंस को रद्द किए जाने तथा उसके फिर से बहाल किए जाने की फाइलों के अध्ययन के दौरान एक नया पहलू उभरकर सामने आया है।

न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एके गांगुली की पीठ के समक्ष बुधवार को इस मामले से संबंधित फाइल पेश की गई। इस तरह का आरोप लगा था कि केंद्र ने दूरसंचार विभाग की 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन नीति को अदालत में चुनौती देने वाली कंपनी के खिलाफ कठोर रुख अख्तियार किया।

पीठ ने कहा कि अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) द्वारा पेश फाइल कुछ अधिक कहती है। यह एक नए पहलू के बारे में बताती है, जो पूरी तरह अलग है। न्यायालय ने एएसजी इंदिरा जयसिंह से कहा कि वह कल सरकार द्वारा इस मामले में बहस शुरू होने पर इस फाइल को लाएँ।

उच्चतम न्यायालय ने कल डॉट को एस-टेल का लाइसेंस रद्द करने और उसे फिर से बहाल करने से संबंधित फाइल को उसके समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था। एस-टेल ने सितंबर, 2007 में पहले आओ पहले पाओ के आधार पर स्पेक्ट्रम आवंटन की तारीख को पहले करने को चुनौती दी थी।

भूषण ने कहा कि यह देश और इसके प्राकृतिक संसाधन लूट के लिए नहीं हैं और यह संदेश निजी कंपनियों और विदेशी निवेशकों को दिए जाने की आवश्यकता है। एक ऐसी धारणा पैदा हुई है कि देश बनाना रिपब्लिक (राजनीतिक और आर्थिक रूप से कमजोर देश) है और उस धारणा को दूर किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने न्यायालय के समक्ष एक न्यूज रिपोर्ट रखी जिसमें 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में सरकारी खजाने को अनुमानित तौर पर हुए नुकसान का ट्राई ने आकलन किया है।

पीठ ने इसके बाद अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह से इस मुद्दे का परीक्षण करने को कहा है और पिछले महीने ट्राई द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट उसके समक्ष पेश करने को कहा।

स्पेक्ट्रम आवंटन नीति पर सवाल : ‘पहले आओ पहले पाओ की नीति’ पर चलकर 2जी स्पेक्ट्रम को बेहद औने-पौने दाम पर आवंटित करने के सरकार के फैसले की उच्चतम न्यायालय में आज कड़ी आलोचना की गई। न्यायालय ने दूरसंचार नियामक संस्था ट्राई से कहा कि वह सरकारी खजाने को कथित तौर पर हुए नुकसान के बारे में अपनी रिपोर्ट दे।

गैर सरकारी संस्था सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) और जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी ने आरोप लगाया कि अपनाई गई नीति अवैध थी और इसका लक्ष्य कुछ दूरसंचार कंपनियों को लाभ पहुँचाना था और पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा के काल में आवंटित सभी स्पेक्ट्रम लाइसेंसों को रद्द किए जाने की आवश्यकता है।

Msn India

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~ by bollywoodnewsgosip on March 3, 2011.

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