हॉलैंड की हालत मेमने जैसी


विश्वकप में रविवार को जिस तरह न्यूजीलैंड और श्रीलंका ने क्रमशः केन्या और कनाडा की कमजोर टीमों को एकतरफा मुकाबले में बुरी तरह मात दी। उसी तर्ज पर इंग्लैंड भी मंगलवार को नागपुर के विदर्भ क्रिकेट स्टेडियम में कमजोर हॉलैंड को रौंदकर बड़े अंतर से जीत हासिल करने के लक्ष्य के साथ उतरेगा।

विश्वकप के दूसरे दिन ग्रुप ए में न्यूजीलैंड ने जिस तरह केन्या को 10 विकेट से रौंदकर और श्रीलंका ने कनाडा को 210 रन से करारी शिकस्त देकर अपने विश्वकप अभियान का विस्फोटक आगाज किया है। उसे देखते हुए तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) का आगामी विश्वकप में एसोसिएट टीमों को इस मेगा टूर्नामेंट से दूर रखने का फैसला सही प्रतीत होता है।

आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हारून लोर्गट ने कहा था कि 2015 के विश्वकप में टीमों की संख्या 14 से घटाकर 10 कर दी जाएगी ताकि केवल टेस्ट खेलने वाले देश ही विश्वकप में हिस्सा ले पाएँगे।

हालाँकि एसोसिएट टीमें आईसीसी के इस फैसला का विरोध करते हुए विश्वकप का हिस्सा बने रहने की माँग कर रही हैं लेकिन रविवार को हुए एकतरफा मैचों के बाद आईसीसी का यह फैसला सही दिखाई पड़ रहा है। दरअसल इन एकतरफा मैचों में कोई रोमांच देखने को नहीं मिलता इसी कारण दर्शक भी इस प्रकार के मैचों में खास दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

इंग्लैंड की टीम न्यूजीलैंड और श्रीलंका से प्रेरणा लेकर हॉलैंड के खिलाफ बड़ी जीत हासिल करना चाहेगी ताकि वह अच्छा नेट रन रेट हासिल कर पाए ताकि टूर्नामेंट में यदि आगे क भी नेट रन रेट के हिसाब से कोई फैसला होता है तो उसे इसका फायदा मिल पाए जबकि हॉलैंड का लक्ष्य इंग्लैंड को कड़ी चुनौती देकर आईसीसी के फैसले को गलत साबित करना होगा।

हालाँकि इंग्लैंड की टीम इस समय जिस जबरदस्त फार्म में खेल रही है उसे देखते हुए हॉलैंड के लिए इंग्लैंड के सामने चुनौती पेश कर पाना बहुत मुश्किल होगा।

इंग्लैंड ने अपने दोनों अभ्यास मैचों में शानदार जीत हासिल की थी। खासकर पाकिस्तान के खिलाफ उसकी 67 रन की जीत विश्वकप की उसकी तैयारियों को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। इंग्लैंड को विश्वकप में आने से पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे में वनडे सिरीज में 1-6 से हार का सामना करना पड़ा था। मगर उसे हालैंड के खिलाफ विश्वकप में विजयी आगाज करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

एंड्रयू स्ट्रास, केविन पीटरसन, जोनाथन ट्राट, इयान बेल, पाल कोलिंगवुड, रवि बोपारा और मैट प्रायर जैसे बल्लेबाजों से सजी इंग्लिश टीम को थामना हॉलैंड के बूते से बाहर की बात होगी। इंग्लैंड का गेंदबाजी आक्रमण भी टिम ब्रेसनन, स्टुअर्ट ब्राड, जेम्स एंडरसन और अजमल शहजाद के रूप में इतना जबरदस्त है कि हॉलैंड का भी केन्या और कनाडा की तरह ही बुरा हाल होने की संभावना है।

हॉलैंड की टीम ने हालाँकि 2009 के ट्वेंटी-20 विश्वकप में पहले ही मैच में इंग्लैंड को लार्ड्स में चौंका दिया था, लेकिन वनडे में उस तरह का करिश्मा दोहराना उसके लिए वाकई मुश्किल होगा।

इंग्लैंड के आलराउंडर रयान टेन डोएचे और एलेक्सी कार्वीजी को काउंटी में खेलने का अच्छा खासा अनुभव है। हॉलैंड के पास ऑस्ट्रेलिया में जन्मे टाम कूपर भी साउद ऑस्ट्रेलिया टीम की तरफ से प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेल चुके हैं। हॉलैंड को अपने इन खिलाड़ियों से उम्मीद रहेगी कि वे इंग्लैंड के सामने कम से क म कुछ चुनौती पेश कर सकें।

Msn India

~ by bollywoodnewsgosip on February 21, 2011.

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